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Friday, 3 October 2014

अथ पद लिख्यते - स्वामी जी श्री रामचरणजी की अनुभव वाणी

स्वामी जी श्री रामचरणजी की अनुभव वाणी

अथ पद लिख्यते

(१)

बाबा सतगुरू की बलिहारी, मोहजाल सुलझाई आंटी काटी बिपति हमारी ।। टेर ।।
शरणे राख करी प्रतिपाला , दीरघ दीन दयाला
राम नामसूं लगन लगाई, भान्या भर्म जंजाला । । १ । ।
काछ बाछ का कलंक मिटाया, सांच शील पिछणाया ।
स्वाद श्रृंगार न व्यापै माया, निज निर्वेद धराया । । २ । ।
रामचरण जन राम स्वरूपा, भक्ति हेत भू आया ।
किरपा करिकै ज्ञान प्रकाश्या , श्रवण द्वार सुणाया । । ३। ।


(२)

अब मैं सतगुरू शब्द पिछाण्या । भागी भूल भया मन चेतन, घरही गोविन्द जाण्या ।। टेर ।।
दशूं दिशा से उलट अफूटी सुरति निरंतर लागी । राम राम रटि भाव बधाया, दूजी भावट भागी । । १ । ।
कोई ध्यावे पीर पैगम्बर, कोई दशूं अवतारा । हमतो सकल एक करि देख्या, अक्षर दोय मंझारा । । २ । ।
सारी सृष्टि रची करता की, कर्ता सबके मांही । ये हम ज्ञान लह्या गुरू गमसै, घटबध दीशै नांही । । ३ । ।
ऐसी दृष्टि रहै मन नहचल कबहूँ भर्मै नांही । रामचरण तिरपति घर पाया आप आपके मांही ।।४।।

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